Goddess Kali

श्री काली माता की आरती

(Kali Mata Ki Aarti (Mangal Ki Seva))

Also known as mamgala ki seva suna meri deva

A Hindi arati whose refrain sets a scene rather than praising: hear this auspicious service, my goddess — we stand at your door with folded hands. The offerings are named as they are laid down, betel leaf and areca, a flag and a coconut, brought and set before the flame. What follows asks in the plainest terms, that the mother of the world hear and not delay, and that the storehouses of the good be filled. A verse in the middle gives her the weapons and the deed at once: sword and skull-bowl and trident in her hands, and Raktabija reduced to ash. Twenty-five short lines with the refrain returning between them, and it ends where such songs end, asking that mother Kali make things well.

Read In:

Script: Devanagari (देवनागरी) — also the script of Hindi, Marathi, Nepali and Konkani.

मंगल की सेवा, सुन मेरी देवा।
हाथ जोड़, तेरे द्वार खड़े।
पान सुपारी, ध्वजा, नारियल,
ले ज्वाला तेरी भेंट धरे॥
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा।
सुन जगदम्बे, कर न विलम्बे
संतन के भण्डार भरे।
संतन-प्रतिपाली, सदा खुशहाली,
मैया जै काली कल्याण करे॥
मंगल की सेवा...॥
बुद्धि विधाता, तू जग माता,
मेरा कारज सिद्ध करे।
चरण कमल का लिया आसरा,
शरण तुम्हारी आन परे॥
मंगल की सेवा...॥
जब-जब भीर पड़ी भक्तन पर,
तब-तब आय सहाय करे।
बार-बार तैं सब जग मोहयो,
तरुणी रूप अनूप धरे॥
मंगल की सेवा...॥
माता होकर पुत्र खिलावे
कहीं भार्या भोग करे।
सन्तन सुखदाई सदा सहाई,
सन्त खड़े जयकार करे॥
मंगल की सेवा...॥
ब्रह्मा विष्णु महेश सहसफण लिए,
भेंट देन तेरे द्वार खड़े।
अटल सिहांसन बैठी मेरी माता,
सिर सोने का छत्र फिरे॥
मंगल की सेवा...॥
वार शनिश्चर कुंकुम बरणो,
जब लुँकड़ पर हुकुम करे।
खड्ग खप्पर त्रिशुल हाथ लिए,
रक्त बीज को भस्म करे॥
मंगल की सेवा...॥
शुंभ निशुंभ को क्षण में मारे,
महिषासुर को पकड़ दले।
'आदित' वारी आदि भवानी,
जन अपने का कष्ट हरे॥
मंगल की सेवा...॥
कुपित होय दानव मारे,
चण्ड मुण्ड सब चूर करे।
जब तुम देखी दया रूप हो,
पल में संकट दूर करे॥
मंगल की सेवा...॥
सौम्य स्वभाव धरयो मेरी माता,
जन की अर्ज कबूल करे।
सात बार की महिमा बरनी,
सब गुण कौन बखान करे॥
मंगल की सेवा...॥
सिंह पीठ पर चढ़ी भवानी,
अटल भवन में राज करे।
दर्शन पावें मंगल गावें,
सिद्ध साधक तेरी भेंट धरे॥
मंगल की सेवा...॥
ब्रह्मा वेद पढ़े तेरे द्वारे,
शिव शंकर ध्यान धरे।
इन्द्र कृष्ण तेरी करे आरती,
चँवर कुबेर डुलाय रहे॥
मंगल की सेवा...॥
जय जननी जय मातु भवानी,
अटल भवन में राज करे।
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली,
मैया जय काली कल्याण करे॥
मंगल की सेवा...॥

Explore More