Goddess Radha

श्री राधाकृपा स्तोत्रम्

(Radha Kripa Stotram)

Also known as Radha Kriya Stotram · radha stotram · krsnapremavinodini krsnanandapradayini

A stotra to Radha as Krishna's own bliss, ever-blissful, shining in his company, mistress of his life, dweller in the lotus bower.

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Script: Devanagari (देवनागरी) — also the script of Hindi, Marathi, Nepali and Konkani.

कृष्णप्रेमविनोदिनि कृष्णानन्दप्रदायिनि
कृष्णानन्दा सदानन्दा कृष्णसंगसुशोभिनि
कृष्णप्राणेश्वरी कृष्णा कमलाकुञ्जवासिनि
राधे राधे राधे राधे नमो दीनकृपालिनि ।। १ ।।
कृष्णकामबिबर्धिनि कृष्णप्रेमप्रदायिनि
कृष्णकामा कृष्णप्रिया कृष्णलीला शिरोमणि
कृष्णवक्षस्थितादेवी कुन्ददामसुशोभिनि
राधे राधे राधे राधे नमो दीनकृपालिनि।। २ ।।
कृष्णकृष्णकृष्णकृष्ण कृष्णनामप्रदायिनि
कृष्णशक्ति कृष्णभक्ति कृष्णनामेबिहारिणि
श्रीकृष्णवल्लभादेवी सुबलावेशधारिणी
राधे राधे राधे राधे नमो दीनकृपालिनि ।। ३ ।।
श्रीकृष्णप्रियवादिनि कृष्णधामप्रदायिनि
कृष्णकान्ता कृष्णवन्द्या कृष्णचारुचित्रमणि
कृष्णप्रेमसदोन्मत्ता गन्धमाल्यादिधारिणि
राधे राधे राधे राधे नमो दीनकृपालिनि ।। ४ ।।
कृष्णनित्यसंयोगिनि कृष्णसंगप्रदायिनि
कृष्णदासि कृष्णराशि कृष्णनिकुंजस्वामिनि
कृष्णचन्द्रप्रियाधीरा घोरसंसारतारिणि
राधे राधे राधे राधे नमो दीनकृपालिनि ।। ५ ।।
कृष्णयोगप्रदर्शिनि कृष्णसुखप्रदायिनि
जितेन्द्रिया यज्ञरूपा श्रीकृष्णयज्ञकारिणि
त्रैलोक्यलोकतारिणि जननीलोकपालिनि
राधे राधे राधे राधे नमो दीनकृपालिनि ।। ६ ।।
कृष्णप्राणप्रियाराधे कृष्णसेवाप्रदायिनि
निष्कलंका नित्यरूपा कृष्णभावेआह्ल्लादिनि
यशोदानन्ददायिनि नीलपद्मविधारिणि
राधे राधे राधे राधे नमो दीनकृपालिनि ।। ७ ।।
श्रीकृष्णचित्तमोहिनि कृष्णभावप्रदायिनि
पद्मगन्धा पद्महस्ता पद्ममाला-विधारिणि
निर्गुणागुणसागरा निगमार्थप्रदायिनि
राधे राधे राधे राधे नमो दीनकृपालिनि ।। ८ ।।
कृष्णचन्द्रमुखीदेवि कृष्णपूर्णबिमोहिनि
विश्वम्भरी विचित्राङ्गी प्रवीणाधर्मपावनि
वृषभानुसुतादेवी वृन्दावनविलासिनि
राधे राधे राधे राधे नमो दीनकृपालिनि ।। ९ ।।
कृष्णप्राणबिन्दुराधे कृष्णमन्त्रस्वरूपिणि
ब्रह्ममयीब्रह्मरूपा वंशीवटविहारिणि
मुरलीवादनप्रिया भक्तमङ्गलदायिनि
राधे राधे राधे राधे नमो दीनकृपालिनि ।। १० ।।
कृष्णकर्मोसदारता कृष्णधर्मप्रदायिनि
वेदमाता वेदगम्या यमुनातटवासिनि
मनोहरमनोहरा राधिकाकृष्णमोहिनि
राधे राधे राधे राधे नमो दीनकृपालिनि ।। ११ ।।
कृष्णप्रेमसञ्चारिणि शक्तीनां शक्तिदायिनि
शब्दातीता गुणातीता शरणागतपालिनि
रासमण्डलमध्यस्था रासनायिकातरूणि
राधे राधे राधे राधे कृष्णदासस्यस्वामिनि ।। १२ ।।
।। इति श्रीकृष्णदासः विरचित श्रीराधाकृपा स्तोत्रम् संपूर्णम् ।।

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