भक्ति-मुक्ति-दायिनि भयहरणि कालिका॥
मंगल-मुद-सिद्धि-सदनि, पर्वशर्वरीश-वदनि,
ताप-तिमिर तरूण-तरणि-किरणमालिका॥
धरणि, दलनि दानव-दल, रण-करालिका।
पूतना-पिशाच-प्रेत डाकिनि-शाकिनि-समेत
भूत-ग्रह-बेताल-खग-मृगालि-जालिका॥
समस्त-लोक-स्वामिनी हिमशैल-बालिका।
रघुपति-पद परम प्रेम, तुलसी यह अचल नेम,
देहु है प्रसर पाहि प्रनतपालिका॥
