बंदौ पद-युग नाइ सिर, विनय करों कर जोर॥
कृपा करहु मो पर महारानी।
अरुण नयन गल में मुण्डमाला॥
हिय हुलसे मन होत सुखारी।
कष्ट निवारो जन जन त्राता॥
अभय करहु मोको जगदम्बे।
बिन बिलम्ब तुम ताहि उबारा॥
किया सहाय मात तुम तब-तब।
शुंभ-निशुंभ के उदर विदारे॥
मारे मरे न अति रणधीरा।
अस्तुति करी तुम तुमहिं पुकारे॥
सेन सहित तुम ताहि निपाता।
नभ दुंदुभी सुमन बहु बरसे॥
जय जय जगदंब भवानी।
जय जग जननी दनुज कुल घालक॥
संकट हरो हमारी माता।
सुयश तुम्हार सकल संसारा॥
गावत गुण गान निश दिन तेते।
तदपि तुम्हार अंत न पावहिं॥
निरखि सकल सुर नर मुनि मोहै।
पाहि पाहि कहि नितहि मनाऊं॥
शक्ति स्वरुप तुम्हार न जाना।
नाम तुम्हारा अनेक भवानी॥
सत्य वात यह वेद उचारी।
ताकौ भय संकट नहीं होई॥
नाम लेत बिनसत हैं तबहिं।
ताके तन नहि रहे कलेशा॥
मनवांछित फल तुरतहि पावै।
बंधन काटि कियौ छुटकारा॥
सुमिरत सिद्ध होय नर पावन।
इच्छित फल पावै नर सोई॥
तासु सोहाग अचल हो जावै।
सन्तति-सुख निश्चय सो लहहिं॥
ताके घर सुख संपत्ति होई।
सो निश्चय धनवान कहावै॥
तब चरणन को ध्यान लगावै।
एहि सम और उपाय न दूजा॥
तेहि पर कृपा करहिं गौरीसा।
वाकौ सब संकट मिटि जावे॥
हरहू बेगि मोहि संकट भारी।
दीन जनि मोहिं अभय कर दीजे॥
छमहूँ सकल अपराध हमारा।
होइ प्रसन्न निज दास पर, लीजै मोहिं उबार॥
देवरिया मण्डल बसूँ, धाम मझौली ग्राम॥
मार्गशीर्ष की पूर्णिमा, कृपा करहु जगदम्ब॥
