दानव-दल-बलहारी, गो-द्विज-हितकारी॥
जय जय गिरिधारी...॥
वंशीधर बनवारी, ब्रज-जन-प्रियकारी॥
जय जय गिरिधारी...॥
आरत-आरति-हारी, जग-मंगल-कारी॥
जय जय गिरिधारी...॥
शबर-सुता-सुखकारी, गौतम-तिय तारी॥
जय जय गिरिधारी...॥
जन-मन-रंजनकारी, दिति-सुत-संहारी॥
जय जय गिरिधारी...॥
बृन्दाबिपिन-बिहारी, यमुना-तट-चारी॥
जय जय गिरिधारी...॥
बिधि-सुरपति-मदहारी, कंस-मुक्ति-कारी॥
जय जय गिरिधारी...॥
कल कीरति-बिस्तारी, भक्त-भीति-हारी॥
जय जय गिरिधारी...॥
