श्री शिव उवाच
प्रवक्ष्याम्यतिगुह्यं हि न कदापि प्रकाशयेत् ॥ 1 ॥
महादेवी महारात्रिर्महिषासुरमर्दिनी ॥ 2 ॥
जया रिक्ता महाशक्तिर्देवमाता कृशोदरी ॥ 3 ॥
महावराहजननी मदनोन्मथिनी मही ॥ 4 ॥
विश्वेश्वरी विश्वमाता वरदाऽभयदा शिवा ॥ 5 ॥
गदिनी मुण्डमाला च कमला करुणालया ॥ 6 ॥
गोलोकनाथरमणी गोलोकेश्वरपूजिता ॥ 7 ॥
गण्डकी सरयूस्तापी रेवा चैव पयस्विनी ॥ 8 ॥
किशोरी केशवनुता महेन्द्रपरिवन्दिता ॥ 9 ॥
कोटिब्रह्माण्डमध्यस्था कोटिब्रह्माण्डकारिणी ॥ 10 ॥
इन्दिरा सिन्धुतनया मातङ्गी लोकमातृका ॥ 11 ॥
तरुणी च तमोहन्त्री मङ्गला मङ्गलायना ॥ 12 ॥
निशुम्भादिहरा माता हरिशङ्करपूजिता ॥ 13 ॥
शरण्या शम्भुवनिता सिन्धुतीरनिवासिनी ॥ 14 ॥
त्रैलोक्यपालिनी तत्त्वरूपा तारुण्यपूरिता ॥ 15 ॥
चन्द्रा शशाङ्कभगिनी गीतवाद्यपरायणा ॥ 16 ॥
इति ते कथितं देवि रमानामशताष्टकम् ॥ 17 ॥
यं यं कामयते कामं तं तं प्राप्नोत्यसंशयम् ॥ 18 ॥
वैकुण्ठपत्न्याः परमादरेण ।
धनाधिपाद्यैः परिवन्दितः स्यात्
प्रयास्यति श्रीपदमन्तकाले ॥ 19 ॥
