जगजननी जय! जय!!
भयहारिणि, भवतारिणि,
भवभामिनि जय जय॥
सत्य सनातन सुन्दर पर-शिव सुर-भूपा॥
जगजननी जय! जय!...॥
अमल अनन्त अगोचर अज आनँदराशी॥
जगजननी जय! जय!...॥
कर्ता विधि, भर्ता हरि, हर संहारकारी॥
जगजननी जय! जय!...॥
मूल प्रकृति, विद्या, तू जननी, जाया॥
जगजननी जय! जय!...॥
तू वाञ्छाकल्पद्रुम, हारिणि सब बाधा॥
जगजननी जय! जय!...॥
अष्टमातृका, योगिनि, नव-नव रूपधरा॥
जगजननी जय! जय!...॥
हैं कपूत कपटी कपूत, तऊ बालक तेरे॥
जगजननी जय! जय!...॥
करुणा कर करुणामयि! चरण-शरण दीजै॥
जगजननी जय! जय!...॥
