प्रेतराज जी का लिखूं, चालीसा हरषाय॥
जय जय भूताधिप प्रबल, हरण सकल दुःख भार।
वीर शिरोमणि जयति, जय प्रेतराज सरकार॥
महा प्रबल त्रय ताप नसावन॥
विकट वीर करुणा के सागर।
भक्त कष्ट हर सब गुण आगर॥
देखत सुन नर मुनि मन मोहे॥
जगमग सिर पर मुकुट सुहावन।
कानन कुण्डल अति मन भावन॥
वीरवेश अति भृकुटि कराला॥
गजारुढ़ संग सेना भारी।
बाजत ढोल मृदंग जुझारी॥
भक्त बृन्द मिलि जय जय बोले॥
भक्त शिरोमणि वीर प्रचण्डा।
दुष्ट दलन शोभित भुजदण्डा॥
दर्शन करत मिटत कलि मलहू॥
घाटा मेंहदीपुर में आकर।
प्रगटे प्रेतराज गुण सागर॥
नाचत भक्त मगन हो मन में॥
भक्त कामना पूरन स्वामी।
बजरंगी के सेवक नामी॥
दुःख संकट सब हरने वाले॥
जो जिस इच्छा से आते हैं।
वे सब मन वाँछित फल पाते हैं॥
शीघ्र स्वस्थ होकर घर जाते॥
भूत पिशाच जिन्न वैताला।
भागे देखत रुप कराला॥
मिटा शीघ्र करते हैं क्रीड़ा॥
कठिन काज जग में हैं जेते।
रटत नाम पूरन सब होते॥
उनके सकल कष्ट प्रभु हरते॥
हे करुणामय स्वामी मेरे।
पड़ा हुआ हूँ चरणों में तेरे॥
मुझे एक आश्रय प्रभु तेरा॥
लज्जा मेरी हाथ तिहारे।
पड़ा हूँ चरण सहारे॥
छूटत रोग शोक सब तन से॥
मेंहदीपुर अवतार लिया है।
भक्तों का दुःख दूर किया है॥
भूत व्याधि सुत अरु धन छीना॥
जो जो तेरे द्वारे आते।
मन वांछित फल पा घर जाते॥
भक्तों ने है लीला गाई॥
महन्त गणेश पुरी तपधारी।
पूजा करते तन मन वारी॥
दूत खड़े रहते हैं मोटे॥
लाल देह सिन्दूर बदन में।
काँपत थर-थर भूत भवन में॥
पाठ करत नित एक अरु बीसा॥
प्रातः काल स्नान करावै।
तेल और सिन्दूर लगावै॥
पुष्पन की माला पहनावै॥
ले कपूर आरती उतारै।
करै प्रार्थना जयति उचारै॥
हर्षित हो अपने घर जाते॥
इच्छा पूरण करते जनकी।
होती सफल कामना मन की॥
ध्यान धरत छूटत सब पातक॥
जय जय जय प्रेताधिप जय।
जयति भुपति संकट हर जय॥
रहत न कबहूँ दुख लवलेशा॥
कह भक्त ध्यान धर मन में।
प्रेतराज पावन चरणन में॥
जयति भक्त रक्षक प्रबल, प्रेतराज सुख मूल॥
विमल वेश अंजिन सुवन, प्रेतराज बल धाम।
बसहु निरन्तर मम हृदय, कहत भक्त सुखराम॥
