कथूं रामदेव विमल यश, सुने पाप विनशाय॥
अजमल गेह बधावणा, जग में जय जयकार॥
अजमल पुत्र अनोखी माया॥
परम प्रतापी अन्तर्यामी॥
तंवर वंश अवतंश कहाये॥
दानव दैत्य दुष्ट संहारे॥
दूध परीण्डा मांही कीन्हा॥
ज्योंही प्रभु पलने प्रगटाये॥
दूध उफणता चरा उठाया॥
चिथड़ों का घोड़ा ही साया॥
भक्त जनों का कष्ट निवारा॥
पुंगल जा प्रभु फंद छुड़ाया॥
जला नगर शरणागत आया॥
मुवा पुत्र हंसता भग आया॥
जा परदेश द्रव्य बहु लाया॥
प्रगत टेर पहुँचे अवतारी॥
बनियां आ जब हाल सुनाया॥
मिश्री बनी नमक सब खारा॥
नमक हुआ मिश्री फिर सारी॥
निकलंग नाड़ी सिरजी प्यारी॥
ल्याय कटोरा कारज सारा॥
निजसर जल खारा करवाया॥
राम सरोवर प्रभु खुदवाया॥
दर्श पाय अतिशय हरषाया॥
दूध थणा बकरया के आया॥
आत्म ज्ञान हरजी ने दीन्हों॥
सूते को धरती लुढ़काया॥
पुत्र पाय मन में हरषाया॥
आये प्रभु सुन गदगद वाणी॥
उक्त उजागर अभय वर दीन्हा॥
हो अन्धा करनी फल पाया॥
सातो तवा बेध प्रभु दीन्हां॥
फेर भक्त को नहीं सताया॥
मुवा पुत्र पल में उठ धाया॥
तब-तब आ तुम दर्शन दीन्हां॥
चढ़ लीले पर जल्दी आते॥
मनवांछित कारज फल पावें॥
ताके कष्ट सकल कट जावे॥
तेरी महिमा अपरम्पारी॥
कहाँ बुद्धि शारद सी लाऊँ॥
मती अनुसार रची चालीसा॥
रखियों प्रभु लज्जा मेरी॥
पावे मनवांछित फल अरु जीवन सुखमय होय॥
