सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक श्रुति धर्मा॥
ॐ जय श्री विश्वकर्मा॥
शिल्प शस्त्र का जग में, ज्ञान विकास किया॥
ॐ जय श्री विश्वकर्मा॥
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई॥
ॐ जय श्री विश्वकर्मा॥
संकट मोचन बनकर, दूर दुःखा कीना॥
ॐ जय श्री विश्वकर्मा॥
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी॥
ॐ जय श्री विश्वकर्मा॥
द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज, सकल रूप साजे॥
ॐ जय श्री विश्वकर्मा॥
मन से दुविधा मिट जावे, अटल शांति पावे॥
ॐ जय श्री विश्वकर्मा॥
कहत 'भजन' यह, सुख-सम्पत्ति पावे॥
ॐ जय श्री विश्वकर्मा॥
